अवकाश के दिनों में साधना
29/04/2020 02:26:49 PM
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अवकाश के दिनों में साधना क्रम महर्षि परिवार से जुड़े अनेक सदस्यों ने प्रश्न पूछा है की लॉक डाउन के दिनों में अथवा अवकाश के दिनों में घर में उनका साधना का क्रम क्या होना चाहिए हमें प्रसन्नता है कि महर्षि संस्थान के सदस्य साधना के प्रति गंभीर हैं और स्वयं व राष्ट्रहित में समय लगाने को तैयार हैं। प्रातः एवं संध्या के ध्यान साधना की चर्या ऐसी होनी चाहिए: प्रातःकाल दैनिकचर्या से निवृत होकर लगभग ७ बजे से प्रारम्भ करें - १५ से २० मिनट योगासन (योगासन मेट पर या १-२ इंच मोटे रुई के गद्दे पर) ५ से १० मिनट प्राणायाम (योगासन मेट पर या १-२ इंच मोटे रुई के गद्दे पर)२० मिनट भावातीत ध्यान २० मिनट सिद्धि सूत्रों का अभ्यास (६ इंच मोटाई के ५० डेंसिटी के फोम पर)१० से ३० मिनट योगिक फ्लाइंग (६ इंच मोटाई के ५० डेंसिटी के फोम पर)१० से २० मिनट विश्राम एवं वेद पाठ श्रवण (लेटकर अथवा सोफे या बिस्तर पर आराम से पैर फैलाकर बैठ कर) यही चर्या सायंकाल की भी होनी चाहिये। ध्यान रहे के भोजन ग्रहण करने के कम से कम तीन घंटे बाद साधना करनी चाहिए। सायंकाल छह बजे से प्रारम्भ करना उत्तम होगा । कृपया ध्यान दें: १० वर्ष से १५ वर्ष के बच्चे और ६० वर्ष से अधिक आयु के अभ्यासकर्ता १० मिनट योगासन, ५ मिनट प्राणायाम, १५ मिनट भावातीत ध्यान, १० मिनट सिद्धि सूत्रों का अभ्यास, १० मिनट योगिक फ्लाइंग और २० मिनट विश्राम करें । जिन्हे किसे तरह के रोग हों और इसमें से किसी भी अभ्यास को करने में l असुविधा हो, वे उसे न करें । वरिष्ठ नागरिक २५ से ३० मिनट का भावातीत ध्यान भी कर सकते हैं । जय गुरु देव, जय महर्षि
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